कश्मीर

2025 में कश्मीर में बिजनेस और बड़े कारखानों का अभाव: आखिर क्यों? एक आसान शब्दों में

कश्मीर, जिसे धरती का स्वर्ग कहा जाता है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत झीलों और बर्फ से ढके पहाड़ों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। हालांकि, जब औद्योगिक विकास की बात आती है, तो यह क्षेत्र अक्सर पीछे छूट जाता है। यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर क्यों कश्मीर में बड़े उद्योग या कारखाने नहीं हैं, जबकि यहां पर्यटन और हस्तशिल्प का समृद्ध इतिहास रहा है। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम उन प्रमुख कारणों का विश्लेषण करेंगे जो कश्मीर में औद्योगिक विकास की कमी के लिए जिम्मेदार हैं।

ऐतिहासिक और राजनीतिक अस्थिरता

कश्मीर में औद्योगिक विकास की कमी का सबसे बड़ा कारण दशकों से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं। लगातार संघर्ष, आतंकवादी गतिविधियां और अशांत माहौल ने निवेशकों को यहां बड़े पैमाने पर निवेश करने से रोका है। कोई भी बड़ा उद्योगपति ऐसे क्षेत्र में भारी पूंजी निवेश नहीं करना चाहेगा जहां उसके निवेश और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता हो।

भौगोलिक चुनौतियां और कनेक्टिविटी

कश्मीर की भौगोलिक स्थिति भी औद्योगिक विकास में एक बड़ी बाधा है। यह एक पहाड़ी क्षेत्र है जहां परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत काफी अधिक होती है। कच्चे माल को बाहर से लाना और तैयार उत्पादों को देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाना महंगा और समय लेने वाला होता है। खराब सड़क नेटवर्क (विशेषकर सर्दियों में बर्फबारी के कारण) और सीमित रेल व हवाई कनेक्टिविटी भी इस समस्या को बढ़ाती है। बड़े कारखानों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुशल परिवहन व्यवस्था आवश्यक है, जिसकी कश्मीर में कमी है।

बिजली की कमी

किसी भी उद्योग के लिए बिजली एक मूलभूत आवश्यकता है। कश्मीर में बिजली उत्पादन में कमी और बढ़ती देनदारियां एक गंभीर समस्या है। कई पनबिजली परियोजनाओं में पानी के बहाव में कमी के कारण उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे उद्योगों को पर्याप्त और सस्ती बिजली उपलब्ध नहीं हो पाती। बिजली की कमी उत्पादन लागत बढ़ाती है और उद्योगों के लिए परिचालन को मुश्किल बनाती है।

सीमित स्थानीय बाजार और कौशल की कमी

कश्मीर का स्थानीय बाजार अपेक्षाकृत छोटा है, जो बड़े पैमाने के उद्योगों के लिए पर्याप्त मांग पैदा नहीं कर पाता। इसके अलावा, बड़े उद्योगों के लिए आवश्यक विशिष्ट कौशल वाले कार्यबल की कमी भी एक चुनौती है। हालांकि यहां पारंपरिक हस्तशिल्प में कुशल कारीगर हैं, लेकिन आधुनिक औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल का अभाव देखा जाता है।

निवेश और सरकारी नीतियां

 

हालांकि सरकार ने जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए नई औद्योगिक नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं की घोषणा की है (जैसे कि पूंजी निवेश प्रोत्साहन, पूंजी ब्याज सहायता, और जीएसटी से जुड़े प्रोत्साहन), लेकिन इन नीतियों का जमीनी स्तर पर प्रभाव दिखने में समय लगता है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक स्थिर और अनुकूल कारोबारी माहौल बनाना महत्वपूर्ण है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद निवेश की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन अभी भी बाहरी कंपनियों का निवेश सीमित है।

प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता और मूल्य संवर्धन की कमी

कश्मीर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से बागवानी (सेब, अखरोट, केसर) और पर्यटन पर निर्भर करती है। ये क्षेत्र रोजगार और राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत हैं, लेकिन इनमें बड़े पैमाने पर औद्योगिक विनिर्माण की गुंजाइश कम है। हस्तशिल्प उद्योग (कालीन, शॉल, लकड़ी की नक्काशी) भी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसमें भी मूल्य संवर्धन (value addition) की कमी देखी गई है, जिससे कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

निष्कर्ष

कश्मीर में बड़े उद्योगों और कारखानों की कमी एक जटिल मुद्दा है जिसके कई कारण हैं, जिनमें राजनीतिक अस्थिरता, भौगोलिक चुनौतियां, बिजली की कमी, सीमित बाजार और कुशल कार्यबल का अभाव शामिल है। हालांकि, सरकार की नई औद्योगिक नीतियां और पर्यटन क्षेत्र में सुधार की उम्मीदें एक सकारात्मक संकेत हैं। यदि सुरक्षा स्थिति में स्थायी सुधार होता है, बुनियादी ढांचे का विकास होता है, और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाते हैं, तो कश्मीर भी औद्योगिक मानचित्र पर अपनी जगह बना सकता है। तब तक, यह क्षेत्र अपनी पारंपरिक अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर ही अधिक निर्भर रहेगा।

 

जन्माष्टमी व्रत और पूजा विधि: एक संपूर्ण मार्गदर्शिका 2025

Volvo XC60 फेसलिफ्ट 2025: ₹71.90 लाख से शुरू, लग्जरी, सुरक्षा और तकनीक का बेजोड़ संगम

रक्षाबंधन 2025 : शुभ मुहूर्त, समय और पूजा विधि। Raksha Bandhan 2025

15 August 2025: क्या आप जानते हैं इस दिन का एक अनजाना सच?

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *