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इस बच्चे के छूते ही सांप मर गया, कैसे? क्या यह असली ‘कृष्ण’ है?

हाल ही में बिहार के एक गाँव में एक ऐसी अविश्वसनीय घटना घटी है, जिस पर शायद ही कोई विश्वास कर पाएगा। एक नन्हा बच्चा, जिसकी उम्र मुश्किल से एक या दो साल होगी, ने सिर्फ अपने मुँह से एक कोबरा सांप को मार डाला! यह घटना इतनी चौंकाने वाली है कि लोग इसे पौराणिक कहानियों से जोड़कर ‘असली कृष्ण’ कहने लगे हैं। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला।

खेलते-खेलते मौत से सामना

यह घटना तब हुई जब गोविंदा नाम का यह मासूम बच्चा अपने घर के पास खेल रहा था। अचानक, एक कोबरा सांप उसके करीब सरक आया। सांप ने बच्चे के हाथ के चारों ओर कुंडली मार ली, शायद हमला करने की तैयारी में था। लेकिन इससे पहले कि कुछ हो पाता, बच्चे ने जिस तरह से प्रतिक्रिया दी, उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

मासूम का ‘अविश्वसनीय’ वार

डरने या रोने के बजाय, गोविंदा ने सांप को काट लिया। उसने सांप को इतनी ज़ोर से काटा कि सांप वहीं मर गया। गाँव वालों ने बाद में पाया कि सांप की मौत बच्चे के काटने से हुई थी। लोग न केवल इस बात से हैरान थे कि बच्चा बच गया, बल्कि इस असाधारण और साहसी कार्य से भी स्तब्ध थे। कुछ लोगों ने तो इसकी तुलना पौराणिक कहानियों से की, यह कहते हुए कि यह उन्हें उन कहानियों की याद दिलाता है जहाँ देवता सांपों को पराजित करते थे।

अस्पताल में जाँच और राहत की साँस

घटना के बाद, गोविंदा बेहोश हो गया और उसे तुरंत पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक उसकी जाँच की यह देखने के लिए कि क्या सांप ने उसे काटा था या ज़हर दिया था। सौभाग्य से, सांप द्वारा उसके शरीर में ज़हर डालने का कोई संकेत नहीं मिला। उसके चेहरे और मुँह पर कुछ सूजन ज़रूर थी, जो संभवतः सांप के शरीर के संपर्क में आने या ज़हर के अवशेष के कारण हुई होगी, लेकिन वह बाद में स्थिर और होश में रहा।

डॉक्टरों ने उसे सुरक्षित रखने के लिए लगातार निगरानी में रखा। उसके माता-पिता और स्थानीय समुदाय बहुत राहत महसूस कर रहे हैं कि वह अब ठीक है।

बरसात का मौसम और सांपों का खतरा

यह घटना बरसात के मौसम में हुई, एक ऐसा समय जब सांप अक्सर घरों और आस-पास के इलाकों में घुस आते हैं क्योंकि उनके प्राकृतिक आश्रय पानी से भर जाते हैं। यही वजह थी कि कोबरा बच्चे के इतने करीब आ गया था।

यह घटना वाकई अविश्वसनीय है और हमें प्रकृति की अप्रत्याशितता और छोटे बच्चों की अदम्य शक्ति की याद दिलाती है। क्या यह वाकई कोई दैवीय चमत्कार था, या सिर्फ एक मासूम बच्चे की किस्मत? आप क्या सोचते हैं? 

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