भगवान श्री कृष्ण हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पूजनीय देवताओं में से एक हैं। उन्हें भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में जाना जाता है, और कई परंपराओं में उन्हें स्वयं परमेश्वर के रूप में भी पूजा जाता है। उनका जीवन, उनकी शिक्षाएं और उनकी लीलाएं सदियों से करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत रही हैं।
श्री कृष्ण का स्वरूप और महत्व
श्री कृष्ण को प्रेम, ज्ञान, वीरता, न्याय और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनका व्यक्तित्व बहुआयामी है – वे एक नटखट बालक, एक युवा प्रेमी (राधा और गोपियों के साथ), एक कुशल रणनीतिकार (महाभारत में), और भगवद गीता के महान उपदेशक के रूप में जाने जाते हैं।
उनकी सबसे महत्वपूर्ण शिक्षाओं में से एक भगवद गीता में मिलती है, जहाँ उन्होंने अर्जुन को धर्म, कर्म, और मोक्ष के सिद्धांतों का उपदेश दिया। यह उपदेश आज भी जीवन की चुनौतियों का सामना करने और सही मार्ग पर चलने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।
कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव
श्री कृष्ण का जन्मदिन, जिसे कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है, हिंदुओं द्वारा हर साल बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार अक्सर अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में आता है, हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।
जन्माष्टमी के दिन, भक्त उपवास रखते हैं, मंदिरों को सजाते हैं, और भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा करते हैं। रात में, जब चंद्रमा उदय होता है, तो कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है, जिसमें विशेष भजन, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई स्थानों पर दही-हांडी जैसे खेल भी खेले जाते हैं, जो कृष्ण की बचपन की शरारतों को दर्शाते हैं।
जन्माष्टमी का संदेश
जन्माष्टमी केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमें भगवान कृष्ण के जीवन और उनकी शिक्षाओं को याद करने का अवसर देता है। यह हमें सिखाता है कि कैसे धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए, प्रेम और सद्भाव फैलाना चाहिए, और अपने कर्तव्यों का पालन निष्ठा से करना चाहिए। यह हमें यह भी याद दिलाता है कि जब भी धर्म की हानि होती है, भगवान स्वयं पृथ्वी पर अवतरित होते हैं।
संक्षेप में, श्री कृष्ण का जीवन और जन्माष्टमी का त्योहार हमें आध्यात्मिक विकास और नैतिक मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
रक्षाबंधन का पावन पर्व 2025 : इसकी शुरुआत, इतिहास और भाई-बहन के रिश्ते में इसका महत्व
रक्षाबंधन 2025 : शुभ मुहूर्त, समय और पूजा विधि। Raksha Bandhan 2025