क्या आप जानते हैं कि भारतीय रेलवे को हर साल पान, गुटखा और तंबाकू थूकने से होने वाली गंदगी को साफ करने पर कितना पैसा खर्च करना पड़ता है? यह आंकड़ा चौंकाने वाला है! विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय रेलवे को इस गंदगी की सफाई पर हर साल लगभग 1200 करोड़ रुपये (एक हज़ार दो सौ करोड़ रुपये) खर्च करने पड़ते हैं। अगर हम इसे हर दिन के हिसाब से देखें, तो यह रोजाना 3 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा होता है! यह एक ऐसी समस्या है जो न केवल रेलवे के बजट पर भारी पड़ रही है, बल्कि हमारे देश की सबसे बड़ी परिवहन प्रणाली की छवि को भी धूमिल कर रही है।
करोड़ों का खर्च, फिर भी गंदगी क्यों?
भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है, जहाँ रोज़ाना करोड़ों यात्री सफर करते हैं। दुर्भाग्य से, बहुत से लोग रेलवे स्टेशनों, प्लेटफॉर्मों और ट्रेनों के अंदर पान, गुटखा या तंबाकू खाकर जहाँ-तहाँ थूक देते हैं। इससे दीवारों, फर्शों और सीटों पर लाल-भूरे दाग पड़ जाते हैं, जो देखने में बेहद भद्दे लगते हैं और साफ करना भी बहुत मुश्किल होता है।
यह 1200 करोड़ रुपये का सालाना खर्च सिर्फ़ इन दागों को हटाने और गंदगी को साफ करने में लगता है। यह पैसा नई ट्रेनों, बेहतर सुविधाओं या यात्रियों के लिए अन्य विकास कार्यों में लगाया जा सकता था।
समस्या की जड़ और उसके परिणाम:
- लापरवाही और जागरूकता की कमी: कई लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर थूकने के गंभीर परिणामों और सफाई पर होने वाले खर्च के बारे में जानकारी नहीं होती, या वे इसकी परवाह नहीं करते।
- स्वास्थ्य जोखिम: थूकने से न केवल गंदगी फैलती है, बल्कि यह कई बीमारियों (जैसे टीबी) के कीटाणुओं को भी फैला सकता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा होता है।
- रेलवे की छवि पर असर: गंदे स्टेशन और ट्रेनें यात्रियों के अनुभव को खराब करती हैं और देश की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।
- संसाधनों की बर्बादी: सफाई के लिए भारी मात्रा में पानी और मानव संसाधन का उपयोग होता है, जो अन्य ज़रूरी कार्यों में लगाया जा सकता था।
रेलवे के प्रयास और चुनौतियाँ:
भारतीय रेलवे इस समस्या से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है:
- जुर्माना: रेलवे परिसर में थूकने या गंदगी फैलाने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। कई जगहों पर आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) द्वारा जुर्माना वसूला भी जाता है।
- जागरूकता अभियान: स्वच्छ भारत अभियान के तहत रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
- स्पिटून कियोस्क (पीकदान): कुछ स्टेशनों पर बायोडिग्रेडेबल पीकदान पाउच उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनकी कीमत 5-10 रुपये होती है। उम्मीद है कि लोग इनका इस्तेमाल करेंगे और गंदगी फैलाने से बचेंगे।
- सफाई अभियान: नियमित रूप से बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाए जाते हैं।
हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद, समस्या अभी भी बनी हुई है क्योंकि लोगों की आदतें आसानी से नहीं बदलतीं।
हमारी जिम्मेदारी क्या है?
यह केवल रेलवे या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हम सभी नागरिकों की भी उतनी ही जिम्मेदारी है।
- स्वच्छता का पालन करें: सार्वजनिक स्थानों पर थूकने या गंदगी फैलाने से बचें।
- दूसरों को जागरूक करें: अपने आसपास के लोगों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करें।
- जुर्माना भरने को तैयार रहें: अगर आप गलती करते हैं, तो जुर्माना भरने और अपनी गलती स्वीकार करने को तैयार रहें।
भारतीय रेलवे हमारी राष्ट्रीय संपत्ति है। इसे साफ-सुथरा रखना हम सभी का कर्तव्य है। जब हम अपनी आदतों में सुधार करेंगे, तभी रेलवे अपने करोड़ों रुपये बचा पाएगा और उन पैसों का उपयोग यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने में कर पाएगा। आइए, एक स्वच्छ और सुंदर रेलवे बनाने में अपना योगदान दें!