Samrat Choudhary आज 15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी बिहार के 23वें मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, इसके पहले 28 जनवरी 2024 से 14 अप्रैल 2026 तक बिहार के उपमुख्यमंत्री बने रहे, नीतीश कुमार के इस्तीफा के बाद इन्हें भारतीय जनता पार्टी बीजेपी BJP का विधायक दल चुना गया है आइए जानते है सम्राट चौधरी जिन्हें कभी राकेश कुमार के नाम से भी जाना जाता था, बिहार के इस 57 वर्षीय बिहार के दशा बदलने वाले उम्मीद और मुख्यमंत्री बनने तक के सफर की पूरी कहानी और पॉलिटिकल करियर ।
Samrat Choudhary Family:
सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर के लखनपुर गाँव में हुआ था। उनकी माँ का नाम पार्वती देवी Parvati Devi और पिता का नाम शकुनी चौधरी है। उनका पैतृक गाँव मुंगेर ज़िले के तारापुर ब्लॉक में स्थित लखनपुर में है। सम्राट का संबंध शीर्ष राजनेताओं के परिवार से है। उनके पिता, शकुनी चौधरी, सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं, और उनकी माँ, पार्वती देवी, तारापुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रही हैं। अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। उनकी शैक्षणिक योग्यताएँ सार्वजनिक विवाद का विषय बन गई हैं।
सम्राट चौधरी की पत्नी और बेटे का नाम?
सम्राट चौधरी की पत्नी का नाम ममता कुमारी बताया जाता है, पेशे से अधिवक्ता हैं और अभी सक्रिय राजनीति में नहीं हैं, लेकिन सामाजिक मुद्दों और महिला सशक्तिकरण पर खुलकर अपनी बात रखती हैं। सम्राट चौधरी और उनकी पत्नी ममता के दो बच्चे हैं बेटे का नाम प्रणय चौधरी तो बेटी का नाम चारू प्रिया बताया जाता है। अगर उनकी पत्नी ममता कुमारी की कमाई के बारे में बताएं, तो 2024-2025 में कुल 12,73,160 रुपये कमाए,यह औसतन लगभग 1 लाख 6 हजार रुपये प्रति माह बनता है।
Samrat Choudhary Caste:
सम्राट चौधरी का जन्म कोइरी (कुशवाहा) जाति में हुआ है। कोइरी जाति बिहार की राजनीति में एक बड़ा और मजबूत वोट बैंक मानी जाती है। यही वजह है कि बीजेपी ने उन्हें लंबे समय से अपना OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) चेहरा बनाया हुआ है। राजनीति के जानकार मानते हैं कि सम्राट चौधरी को आगे लाकर बीजेपी सीधे तौर पर यादवों के मुकाबले कोइरी समाज को साधना चाहती है।
Samrat Choudhary Political Career:
सम्राट चौधरी का परिवार शुरू से ही राजनीति से जुड़ा हुआ था, इनकी माता पार्वती देवी विधायक रही, पिता शकुनी चौधरी राजनीति के बादशाह रहे,इसलिए पॉलिटिक्स में अपनी नई पहचान बनाना इनके लिए कोई बड़ा टास्क नहीं था। आईए जानते है इनकी पॉलिटिक्स करियर की शुरुआत से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक का सफर:
• 1990 से राजनीति में सक्रिय हुए। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़कर राजनीति की शुरुआत की।
• मई 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में कृषि मंत्री बने। उस समय वे विधायक या MLC नहीं थे। कुछ महीनों बाद, नवंबर 1999 में राज्यपाल ने गैर-विधायक/कम उम्र होने के कारण उन्हें पद से हटा दिया। यह उनका पहला मंत्री पद था।
• साल 2000 में परबत्ता सीट से पहली बार विधायक बने ।
• 2005 में परबत्ता से चुनाव हार गए, लेकिन 2010 में इसी सीट से जीतकर फिर विधायक बने । 2010 में विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक (Chief Whip) बनाए गए।
• 2014 में सम्राट चौधरी का RJD से तनाव गहराता चला गया। जीतन राम मांझी सरकार में मंत्री बनाए गए और शहरी विकास एवं आवास मंत्री रहे।
• 2014 से 2017 तक जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) से जुड़े रहे।
• 2018 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए।
• 2015-2020 के दौरान विधान परिषद (MLC) के तौर पर पहला कार्यकाल रहा।
• 2020 में MLC के तौर पर दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ।
• साल 2021 में नीतीश कुमार सरकार में भाजपा कोटे से पंचायती राज मंत्री बने और 2022 तक इस पद पर रहे।
• अगस्त 2022 में विधान परिषद में विपक्ष के नेता बनाए गए।
• मार्च 2023 में बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चुने गए।
• साल 2024 में, नीतीश कुमार की NDA सरकार में विजय कुमार सिन्हा के साथ सम्राट चौधरी भी उपमुख्यमंत्री बनाए गए।
• फिर 2025 के चुनाव में 45 हज़ार से ज़्यादा वोटों से जीत दर्ज की और नीतीश कुमार की 10वीं सरकार में उपमुख्यमंत्री बने।
• 14 अप्रैल 2026 को, नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया। NDA ने सम्राट चौधरी को नया मुख्यमंत्री उम्मीदवार चुना।
• आज 15 अप्रैल 2026 को, सम्राट चौधरी बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।
सम्राट चौधरी के पास करोड़ों की संपत्ति:
चुनावी हलफनामे के मुताबिक, सम्राट चौधरी के पास करीब 11.34 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसमें से लगभग 28 लाख रुपये उनकी पत्नी के नाम पर हैं। खास बात यह है कि उन पर कोई कर्ज नहीं है।
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