आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर जगह है – आपके स्मार्टफोन से लेकर बड़ी-बड़ी कंपनियों तक। ChatGPT जैसे AI मॉडल्स ने तो दुनिया को हैरान कर दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस शख्स को “AI का गॉडफादर” कहा जाता है, उसने हाल ही में Google जैसी दिग्गज कंपनी से इस्तीफा दे दिया, ताकि वह AI के संभावित खतरों के बारे में खुलकर बात कर सके? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं जेफ्री हिंटन (Geoffrey Hinton) की।
कौन हैं जेफ्री हिंटन?
जेफ्री हिंटन एक ब्रिटिश-कनाडाई संज्ञानात्मक मनोवैज्ञानिक (cognitive psychologist) और कंप्यूटर वैज्ञानिक (computer scientist) हैं, जिन्हें न्यूरल नेटवर्क (Neural Networks) और डीप लर्निंग (Deep Learning) के क्षेत्र में उनके pioneering काम के लिए जाना जाता है। उनके काम ने ही आज के आधुनिक AI की नींव रखी है। उन्हें अक्सर “डीप लर्निंग के गॉडफादर” में से एक माना जाता है। 2018 में, उन्हें योशुआ बेंगियो और यान लेकन के साथ ट्यूरिंग अवार्ड (Turing Award) से सम्मानित किया गया था, जिसे कंप्यूटिंग का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है।
उन्होंने एक दशक से भी ज़्यादा समय तक Google में काम किया, जहाँ उनके शोध ने कंपनी के AI प्रोडक्ट्स को आकार दिया।
उनके प्रयास और योगदान
हिंटन के प्रयासों ने AI के क्षेत्र में क्रांति ला दी। उनके कुछ प्रमुख योगदानों में शामिल हैं:
- बैकप्रॉपगेशन (Backpropagation) का विकास: यह एक एल्गोरिथम है जो न्यूरल नेटवर्क को सीखने में मदद करता है। यह आज भी डीप लर्निंग के लिए एक fundamental technique है।
- डीप लर्निंग की नींव: उन्होंने दिखाया कि कैसे कई परतों वाले न्यूरल नेटवर्क (deep neural networks) जटिल पैटर्न को सीख सकते हैं, जिससे इमेज रिकॉग्निशन, स्पीच रिकॉग्निशन और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में breakthrough हुए।
- AI रिसर्च को बढ़ावा: उनके काम ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को AI में रिसर्च करने के लिए प्रेरित किया, जिससे आज हम AI में इतनी प्रगति देख रहे हैं।
संक्षेप में, आज आप जो भी AI-पावर्ड तकनीक देखते हैं, चाहे वह आपके फोन का फेस अनलॉक हो, Google Photos में ऑब्जेक्ट रिकॉग्निशन हो, या ChatGPT की भाषा समझने की क्षमता हो, उन सभी में हिंटन के काम की गहरी छाप है।
तो उन्होंने AI को इतना खतरनाक क्यों बताया?
जेफ्री हिंटन ने Google से इस्तीफा देने के बाद खुलकर AI के संभावित खतरों के बारे में बात करना शुरू किया। उनकी चिंताएँ कई स्तरों पर हैं:
- अत्यधिक शक्तिशाली AI का विकास (Development of Superintelligent AI): हिंटन को डर है कि AI सिस्टम इतनी तेज़ी से विकसित हो रहे हैं कि वे जल्द ही इंसानों की बुद्धिमत्ता को पार कर सकते हैं। अगर ऐसा आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) या आर्टिफिशियल सुपरइंटेलिजेंस (ASI) हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाता है, तो इसके परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं। वे कहते हैं, “यह विचार कि ये चीज़ें हमसे ज़्यादा स्मार्ट हो सकती हैं… कुछ लोगों ने इसे sci-fi कहा, लेकिन अब यह एक वास्तविक चिंता है।”
- दुरुपयोग (Misuse): AI का उपयोग गलत उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, जिससे समाज के लिए गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं:
- स्वायत्त हथियार (Autonomous Weapons): ऐसे हथियार जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के खुद ही निर्णय लेकर हमला कर सकते हैं, जिससे युद्धों की प्रकृति बदल सकती है और अनियंत्रित हिंसा बढ़ सकती है।
- गलत सूचना और दुष्प्रचार (Disinformation and Propaganda): AI का उपयोग करके अत्यधिक यथार्थवादी नकली तस्वीरें, वीडियो (deepfakes) और टेक्स्ट बनाए जा सकते हैं। इससे समाज में भ्रम फैल सकता है, चुनाव प्रभावित हो सकते हैं और लोगों का एक-दूसरे पर से भरोसा उठ सकता है।
- निगरानी (Surveillance): सरकारों या बड़ी कंपनियों द्वारा AI का उपयोग नागरिकों की बड़े पैमाने पर निगरानी करने के लिए किया जा सकता है, जिससे गोपनीयता (privacy) का उल्लंघन होगा।
- नौकरियों का नुकसान (Job Displacement): जैसे-जैसे AI अधिक कुशल और सक्षम होता जाएगा, यह कई white-collar jobs (जैसे legal assistants, paralegals, accountants) को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी और सामाजिक असमानता बढ़ सकती है।
- नियंत्रण खोना (Loss of Control): हिंटन चिंतित हैं कि हम ऐसे AI सिस्टम बना रहे हैं जिनकी जटिलता इतनी बढ़ जाएगी कि हम उनके आंतरिक कामकाज को पूरी तरह से समझ या नियंत्रित नहीं कर पाएंगे। अगर AI अपने लक्ष्यों को हमारे लक्ष्यों से ऊपर रखने लगता है, तो यह एक बड़ी समस्या बन सकती है।
निष्कर्ष
जेफ्री हिंटन जैसे AI पायनियर की ये चेतावनियाँ हमें AI के विकास के प्रति अधिक सतर्क और जिम्मेदार होने की याद दिलाती हैं। उनका उद्देश्य AI के खिलाफ होना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हम इसके संभावित जोखिमों को समझें और उन्हें कम करने के लिए अभी से काम करें। यह हमें AI के लिए नियम और कानून बनाने, इसके विकास में नैतिकता को शामिल करने और इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने की ज़रूरत पर ज़ोर देता है। AI का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब हम इसके खतरों को गंभीरता से लें और समझदारी से आगे बढ़ें।
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