आईपीएल केवल एक खेल नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा स्पोर्ट्स बिजनेस मॉडल बन चुका है। टीम आईपीएल में जीतने हारने के बाद भी उसकी कमाई लाखों और करोड़ों में हो जाती है। साल 2026 में इसकी वैल्यूएशन अरबों डॉलर पार कर चुकी है। आइए समझते हैं कि बीसीसीआई (BCCI) और आईपीएल टीमें (Franchises) पैसा कैसे कमाती हैं।
IPL में सेंट्रल रेवेन्यू (Central Revenue) – सबसे बड़ा हिस्सा
यह वह पैसा है जो बीसीसीआई IPL के दौरान इकट्ठा करता है और फिर उसका 50% हिस्सा सभी टीमों के बीच बराबर बांट देता है।
मीडिया राइट्स : यह कमाई का सबसे बड़ा जरिया है (लगभग 60-70%), स्टार स्पोर्ट्स (TV) और Jio Hotstar (Digital) जैसे ब्रॉडकास्टर्स हजारों करोड़ रुपये लाइव स्ट्रीमिंग के लिए हर साल बीसीसीआई को देते हैं।
टाइटल स्पॉन्सरशिप (Title Sponsorship): सोचो अगर IPL को हर साल सिर्फ आईपीएल के नाम से ही जाना जाता जैसे IPL 2026 तो यह टाइटल उतना अट्रैक्टिव नहीं है, अगर लिखा हो TATA IPL 2026 तो खुद में यूनिक लगने लगता है। बिजनेस मॉड्यूल भी ऐसे ही काम करता है जहां किसी नाम को ब्रांड बनाकर पैसे कमाए जाते हैं।
आईपीएल की शुरुआत में टाइटल स्पॉन्सरशिप DLF IPL फिर लंबे समय तक वीवो आईपीएल (VIVO IPL) से हुआ करता था, किंतु बाद में इसे TATA IPL के नाम से जाना जाने लगा। जिससे टाटा के शेयर और बिजनेश दोनों में भारी उछाल आया,’TATA IPL’ टाइटल स्पॉन्सर बनने के लिए कंपनियां हर साल भारी भरकम रकम चुकाती हैं।
फ्रेंचाइजी (टीम्स) IPL की अपनी कमाई के जरिए :
बीसीसीआई से मिलने वाले हिस्से के अलावा टीमें खुद भी कई तरीकों से पैसा कमाती हैं:
ब्रांड स्पॉन्सरशिप: अक्सर आपने देखा होगा मैच के दौरान खिलाड़ियों के जर्सी पर तरह-तरह की कंपनियों के लोगों और डिजाइन बने होते हैं, खिलाड़ियों की जर्सी पर आगे, पीछे और बाजू पर जो कंपनियों के लोगो (Logo) होते हैं, उनके लिए टीमें करोड़ों रुपये लेती हैं। इसका फायदा सिर्फ इतना है की हर लाइव स्ट्रीम मैच में उन ब्रांड Logo को कई बार पब्लिक (People) देखती है जिन्हें लोग याद रखे, जिससे कंपनी की सेल्स बढ़ती है और मुनाफा कई गुना।
टिकटों की बिक्री (Gate Revenue): हर टीम अपने होम ग्राउंड पर 7 मैच खेलती है। टिकटों की बिक्री से होने वाली कमाई का लगभग 80% हिस्सा उस होम टीम को मिलता है।
• मर्चेंडाइज (Merchandise): टीम की जर्सी, टोपी और अन्य सामान बेचकर होने वाली कमाई। इसके अलावा, पीने पानी की बोतल, फास्ट फूड्स, ब्रांड जर्सी जैसी ब्रांड कंपनियां (Stall Rights) शामिल है। जो एक मैच में मोटी कमाई कर लेते हैं ।
• प्राइज मनी (Prize Money): जीतने वाली टीम और रनर-अप को मिलने वाली इनामी राशि (हालांकि यह कुल बजट का बहुत छोटा हिस्सा होता है)।
बीसीसीआई (BCCI) की IPL से शुद्ध कमाई
बीसीसीआई को हर साल मीडिया राइट्स स्पॉन्सर टाइटल के जरिए करोड रुपए मिलते हैं लगभग 50% लेकिन यहां यही तक सीमित नहीं है बीसीसीआई के कमाई की अन्य भी जरिए है:
• हर फ्रेंचाइजी अपनी कुल साल की कमाई का 20% हिस्सा बीसीसीआई को ‘लाइसेंस फीस’ के रूप में देती है। ताकि उनकी टीमें मैच में खेल सके।
• जब भी मैच शुरू होता है से लेकर मैच के खत्म होने तक फील्ड के चारों ओर आपने बड़े-बड़े कंपनियों के लोगो (Logos) या उनके बारे में, जैसे गूगल पिक्सल्स, के वीडियो बैनर्स दिखाए जाते है। आदि अन्य मैच के दौरान मैदान पर होने वाले विज्ञापनों (ad) से भी बीसीसीआई की बड़ी आय होती है।विज्ञापन डिजिटल दुनिया में कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है।
एक मैच की कीमत: आईपीएल के एक मैच की ब्रॉडकास्टिंग वैल्यू अब ₹100 करोड़ से भी ऊपर जा चुकी है (जो कि इंग्लिश प्रीमियर लीग के करीब है)।इम्पैक्ट प्लेयर और एड्स: नए नियमों और डिजिटल स्ट्रीमिंग (4K/Interactive) ने विज्ञापन दरों को 25% तक बढ़ा दिया है।
तो दोस्तों, अब आप समझ गए होंगे कि आईपीएल में टीम के हारने या जीतने से ज्यादा महत्व उसके ‘ब्रांड वैल्यू’ का है। यही कारण है कि आज आईपीएल दुनिया की दूसरी सबसे मूल्यवान स्पोर्ट्स लीग बन चुकी है। क्या आपको लगता है कि भविष्य में कोई और खेल आईपीएल के इस बिजनेस मॉडल को टक्कर दे पाएगा? कमेंट में अपनी राय जरूर दें!
BCCI: The Board of Control for Cricket in India : https://www.bcci.tv/















