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मॉनसून 2025 की वापसी: बारिश ने दी राहत, खेती और शहरों की धड़कन तेज़!

मानसून सिर्फ मौसम नहीं, भारत की धड़कन है : भारत में मॉनसून का मतलब सिर्फ बारिश नहीं होता — यह किसानों की उम्मीद, अर्थव्यवस्था की गति और आम आदमी की राहत से जुड़ा होता है।जून 2025 में मॉनसून ने इस बार समय पर दस्तक दी, और केरल से शुरू होकर देशभर में फैल चुका है। खेतों में हरियाली लौट आई है, और शहरों में भी राहत की सांस महसूस हो रही है।

कृषि पर असर – किसान मुस्कुरा उठे खरीफ फसलें जैसे धान, मूंगफली, कपास, गन्ना आदि पूरी तरह मॉनसून पर निर्भर हैं।राजस्थान और महाराष्ट्र के वो इलाके जहाँ अप्रैल-मई में सूखा था, अब राहत की सांस ले रहे हैं। जल-स्तर में सुधार भी देखने को मिला है, छोटे तालाब और बांध भरने लगे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है: अगर जुलाई और अगस्त में भी वर्षा नियमित रही, तो 2025 का कृषि उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर जा सकता है।

शहरों और आम जीवन पर असर – राहत के साथ चुनौती भी जहाँ एक तरफ़ लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं बारिश ने शहरों की समस्याएं भी उजागर कर दीं।

समस्याएँ जो सामने आईं: गुरुग्राम में जलभराव, सड़कों पर गड्ढे और ट्रैफिक का संकट। कोलकाता में भारी वर्षा से लोकल ट्रेन सेवाओं पर असर। भोपाल में तेज़ बारिश से पेड़ गिरने और ट्रांसपोर्ट में बाधा।

मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी – अलर्ट पर रहें। IMD ने कई राज्यों में येलो और रेड अलर्ट जारी किया है, खासकर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक जैसे प्रदेशों में जहां भारी मात्रा में वर्षा होती है। अलर्ट का मतलब- भारी बारिश, तेज हवाए, बाढ़ जैसे हालात, लैंडस्लाइड / बिजली गिरने की संभावना। 

भारत के लिए बारिश वरदान: भारत में 70% से ज्यादा बारिश सिर्फ मॉनसून में होती है। एक अच्छी मॉनसून से GDP में 1.5–2% तक असर पड़ सकता है, 70 करोड़ से ज्यादा लोग आज भी खेती या उससे जुड़े रोजगार में हैं – जिनके लिए मॉनसून जीवन रेखा है। मानसून – एक वरदान, अगर समझदारी से अपनाया जाए। बारिश सिर्फ बूंदें नहीं लाती, वो खुशहाली, राहत और साथ में ज़िम्मेदारी भी लाती है।मानसून 2025 ने अच्छा आगाज़ किया है। अगर हम प्राकृतिक चेतावनियों पर ध्यान दें। साफ-सफाई रखें और जल-प्रबंधन सीखें, तो यह सीजन बहुत कुछ बेहतर बना सकता है। 

 

 

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