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एडिक्शन यानी लत एक मीठा ज़हर जो धीरे-धीरे जीवन को खा जाता है – जानिए क्यों?

एडिक्शन

 

एडिक्शन क्या है?

एडिक्शन यानी लत एक मानसिक और शारीरिक स्थिति है जिसमें इंसान किसी आदत, पदार्थ या गतिविधि पर इस हद तक निर्भर हो जाता है कि उसके बिना उसका जीवन अधूरा या असहाय लगता है। चाहे वो शराब, सिगरेट, ड्रग्स, मोबाइल, गेमिंग, सोशल मीडिया, शॉपिंग, या फिर किसी इंसान की जरूरत हो — जब कुछ चीज़ें इंसान के सोचने-समझने की शक्ति को नियंत्रित करने लगें और उसका नियंत्रण खुद पर न रहे, तो समझिए वह एडिक्शन की गिरफ़्त में है।लत का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि शुरू में यह व्यक्ति को खुशी, आराम और सुकून का अनुभव कराता है। पर धीरे-धीरे यह खुशी ज़रूरत में बदल जाती है, ज़रूरत मजबूरी बनती है, और मजबूरी ज़िंदगी की तबाही बन जाती है।

लत के असर: जीवन कैसे बर्बाद होता है?

1. मानसिक प्रभाव: एडिक्शन इंसान के दिमाग को बुरी तरह प्रभावित करता है। डोपामिन नामक केमिकल की असंतुलन से व्यक्ति को हमेशा ‘और चाहिए’ वाली भावना होती है। ध्यान, एकाग्रता, और स्मरण शक्ति कमजोर होने लगती है।

2. शारीरिक नुकसान: ड्रग्स, तम्बाकू, शराब जैसी लत शरीर के अंगों को धीरे-धीरे नष्ट कर देती है। लीवर, फेफड़े, दिल, किडनी आदि पर बुरा असर पड़ता है। त्वचा ढीली पड़ती है, नींद खराब होती है, और शरीर समय से पहले बूढ़ा हो जाता है।

3. सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों में दरार: लत व्यक्ति को अकेला कर देती है। वह परिवार से कटने लगता है, रिश्ते बिगड़ते हैं, दोस्त दूर हो जाते हैं। अक्सर एडिक्शन से ग्रसित लोग झूठ बोलते हैं, चोरी करते हैं, या हिंसक व्यवहार करने लगते हैं।

4. आर्थिक बर्बादी: अधिकतर लतों की पूर्ति के लिए पैसे की जरूरत होती है। धीरे-धीरे बचत खत्म हो जाती है, कर्ज बढ़ जाता है, और व्यक्ति चोरी-धोखाधड़ी तक करने लगता है।

5. आत्महत्या या अपराध तक ले जाना: एडिक्शन का चरम स्तर व्यक्ति को मानसिक बीमारियों, डिप्रेशन, और आत्महत्या जैसे कदम उठाने की तरफ धकेल देता है। कई बार व्यक्ति अपराधों की ओर भी बढ़ जाता है।

6. नए फैशन की लत : आज हर एक बच्चा , पढ़ने वाला, काम करने वाला, बूढ़ा जवान इस लत का पूरी तरह शिकार है, जिसके बिना खाना पीना सब बेकार लगता है, वो है आज का स्मार्ट फोन जो हर एक बच्चे को अंदर ही अंदर खत्म कर रहा है। 

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इसका समाधान (सॉल्यूशन) क्या है?

1. स्वीकार करें कि आप एडिक्शन में हैं: पहला और सबसे जरूरी कदम यह है कि आप खुद मानें कि आपको किसी चीज़ की लत है। खुद को धोखा देना सबसे बड़ा नुकसान है।

2. खुद को व्यस्त रखें: मन और शरीर को व्यस्त रखने से लत पर काबू पाया जा सकता है। व्यायाम, ध्यान (Meditation), पढ़ाई, नई हॉबीज़, सामाजिक सेवा आदि से धीरे-धीरे उस लत को बदला जा सकता है।

3. सोशल सपोर्ट लें: परिवार, दोस्त, और प्रियजनों का साथ बहुत जरूरी है। उनसे बात करें, अपनी स्थिति शेयर करें। आप अकेले नहीं हैं — यही भावना बहुत मदद करती है।

4. पेशेवर सहायता लें: आजकल नशा मुक्ति केंद्र (Rehabilitation Centers), मनोवैज्ञानिक सलाहकार (Psychologist), और हेल्पलाइन जैसे संसाधन उपलब्ध हैं। आपको शर्माने की ज़रूरत नहीं है।

5. डिजिटल डिटॉक्स करें: अगर आपकी लत मोबाइल या सोशल मीडिया की है तो कुछ दिन का डिजिटल डिटॉक्स बहुत जरूरी है। बिना नोटिफिकेशन और स्क्रीन के समय बिताएं।

6. खुद को प्रेरित करें: अपने लक्ष्य, परिवार और भविष्य की याद दिलाएं। एक डायरी में अपनी यात्रा लिखें और हर एक छोटी जीत को सेलिब्रेट करें

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