परमाणु बैटरी
चीन का नया परमाणु बैटरी

चीन ने बनाया परमाणु बैटरी : क्या होगा 2025 में दुनिया पर इसका असर

हाल ही में चीन ने एक ऐसी परमाणु बैटरी बनाने का दावा किया है जो किसी भी सिक्के से भी छोटी है, लेकिन उसकी खासियत यह है कि यह एक अलग तरीके का परमाणु बैटरी है! जी हाँ, आपने सही सुना, यह कोई आम बैटरी नहीं है, बल्कि यह निकेल-63 (Nickel-63) नामक एक रेडियोधर्मी आइसोटोप का इस्तेमाल करती है। यह खबर दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ छोटे, लंबे समय तक चलने वाले और बिना चार्जिंग वाले पावर स्रोतों की ज़रूरत है। आइए, आसान शब्दों में समझते हैं कि यह तकनीक क्या है और इसके क्या मायने हैं।

क्या है यह परमाणु बैटरी?

यह बैटरी बीजिंग स्थित कंपनी बीटावोल्ट (Betavolt) ने बनाई है। इसका आधिकारिक नाम बीवी100 (BV100) है। यह एक परमाणु ऊर्जा बैटरी है, जिसका मतलब है कि यह परमाणु क्षय (nuclear decay) से निकलने वाली ऊर्जा का उपयोग करती है। लेकिन घबराइए नहीं, यह कोई परमाणु बम जैसी खतरनाक चीज़ नहीं है! यह एक सुरक्षित और स्थिर प्रक्रिया पर आधारित है।

यह काम कैसे करती है?

यह बैटरी बीटावोल्टेइक (Betavoltaic) तकनीक पर काम करती है। इसमें निकेल-63 (Nickel-63) नामक एक रेडियोधर्मी आइसोटोप का उपयोग किया जाता है। निकेल-63 धीरे-धीरे इलेक्ट्रॉन (बीटा कण) छोड़ता है। इन इलेक्ट्रॉनों को एक अर्धचालक (semiconductor) सामग्री के माध्यम से गुजारा जाता है, जो इन इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा (kinetic energy) को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदल देती है।

सरल शब्दों में कहें तो:

  1. रेडियोधर्मी स्रोत: बैटरी के अंदर निकेल-63 होता है।
  2. ऊर्जा उत्सर्जन: निकेल-63 धीरे-धीरे बीटा कण (इलेक्ट्रॉन) छोड़ता है।
  3. बिजली में बदलना: ये बीटा कण एक खास अर्धचालक परत से टकराते हैं, जिससे बिजली पैदा होती है।

यह प्रक्रिया एक छोटे से परमाणु जनरेटर की तरह काम करती है, जो बिना किसी बाहरी चार्जिंग या रखरखाव के लगातार बिजली पैदा करता रहता है।

इस बैटरी की खासियतें क्या हैं?

यह छोटी सी परमाणु बैटरी कई मायनों में बेहद खास है:

  • सिक्के से भी छोटी: यह वाकई अविश्वसनीय है कि इतनी शक्तिशाली बैटरी एक सिक्के से भी छोटी है। इसका आकार 15x15x5 मिलीमीटर है।
  • लंबी उम्र: कंपनी का दावा है कि यह बैटरी 50 साल तक लगातार बिजली पैदा कर सकती है, बिना किसी चार्जिंग या रखरखाव के! यह स्मार्टफोन या लैपटॉप की बैटरी से बिल्कुल अलग है, जिन्हें हर दिन चार्ज करना पड़ता है।
  • बिना चार्जिंग की ज़रूरत: एक बार लगाने के बाद, आपको इसे कभी चार्ज करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। यह अपने आप काम करती रहेगी।
  • सुरक्षित: यह बैटरी परमाणु विखंडन (fission) पर आधारित नहीं है, जो परमाणु रिएक्टरों में होता है। यह बीटा क्षय पर आधारित है, जो बहुत कम ऊर्जा वाले बीटा कण छोड़ता है। कंपनी का दावा है कि यह विकिरण (radiation) लीक नहीं करती और इसकी बाहरी परतें इसे पूरी तरह से सुरक्षित बनाती हैं। इस्तेमाल के बाद, निकेल-63 एक स्थिर और गैर-रेडियोधर्मी तांबे के आइसोटोप में बदल जाता है, जिससे पर्यावरण को कोई खतरा नहीं होता।
  • तापमान सहिष्णुता: यह -60°C से 120°C तक के तापमान में भी काम कर सकती है।

इसके संभावित उपयोग क्या हैं?

इस अनोखी बैटरी के कई क्रांतिकारी उपयोग हो सकते हैं:

  • स्मार्टफोन और लैपटॉप: भविष्य में, आपके स्मार्टफोन या लैपटॉप को 50 साल तक चार्ज करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी!
  • मेडिकल उपकरण: पेसमेकर (pacemakers) जैसे इम्प्लांटेबल मेडिकल उपकरणों के लिए यह गेम चेंजर हो सकती है, क्योंकि उन्हें बार-बार बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
  • एयरोस्पेस और रक्षा: ड्रोन, छोटे उपग्रहों और रक्षा उपकरणों के लिए यह एक आदर्श पावर स्रोत हो सकती है, जहाँ लंबी अवधि की स्वायत्तता (autonomy) की आवश्यकता होती है।
  • सेंसर और IoT डिवाइस: दूरदराज के क्षेत्रों में लगे सेंसर या इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) उपकरणों को लगातार बिजली देने के लिए यह बहुत उपयोगी होगी।
  • रोबोटिक्स: ऐसे रोबोट जो लंबे समय तक बिना मानवीय हस्तक्षेप के काम करते हैं, उनके लिए यह बैटरी वरदान साबित हो सकती है।

चुनौतियाँ और भविष्य

हालांकि यह तकनीक बहुत आशाजनक है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी हैं:

  • उत्पादन लागत: शुरुआती दौर में इसका उत्पादन महंगा हो सकता है।
  • बड़े पैमाने पर उत्पादन: इसे बड़े पैमाने पर बनाना और आम लोगों तक पहुंचाना एक चुनौती होगी।
  • नियामक अनुमोदन: सुरक्षा और पर्यावरण मानकों को पूरा करने के लिए इसे दुनिया भर के नियामकों से अनुमोदन प्राप्त करना होगा।

बीटावोल्ट कंपनी का कहना है कि वे इस तकनीक को बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार कर रहे हैं और उम्मीद है कि यह भविष्य में हमारे जीवन जीने और तकनीक का उपयोग करने के तरीके को बदल देगी।

यह छोटी सी परमाणु बैटरी वाकई विज्ञान और इंजीनियरिंग का एक अद्भुत उदाहरण है। यह हमें एक ऐसे भविष्य की ओर ले जा सकती है जहाँ हमें अपने उपकरणों को चार्ज करने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी, और जहाँ ऊर्जा के स्रोत अधिक टिकाऊ और कुशल होंगे।

 

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